मंगलवार, 9 मार्च 2010

दिखेगी 'तैंतीस' की ताकत


देश की आधी आबादी के लिए ये जश्न का दौर है। आज नया इतिहास रच दिया गया है। तैंतीस की ताकत हासिल करने की दिशा में महिलाओं ने एक अहम मुकाम हासिल कर लिया है। तमाम विरोधों के बावजूद आखिरकार राज्य सभा में महिला आरक्षण बिल को हरी झंडी दे दी गई। बिल के समर्थन में 186 सांसदों ने अपना मत दिया, जबकि विरोध में महज एक सांसद का मत था। मतलब साफ है सारा देश महिलाओं को मजबूत देखना चाहता है, इसलिए बिल का विरोध करने वाली आवाज़ साबित हुई नक्कारखाने में तूती की आवाज़। हालांकि बिल का असली मकसद तब हासिल होगा,जब वंचित महिलाओं को इसका हक मयस्सर होगा।

बिल की राह में कांटे कम नहीं थे। राज्यसभा में पेश होने के बाद हंगामा इतना बरपा कि नौ बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लालू, मुलायम और शरद के सिपहसालारों ने तो ये ठान लिया था कि बिल को किसी भी हालत में पास नहीं होने दिया जाएगा। पहले दिन बिल की कॉपी फाड़कर सभापति हामिद अंसारी के उपर लहरा दी गई तो, दूसरे दिन हंगामा करने वाले सांसदों में से एक ग्लास का टूटा हुआ शीशा सीने से लगाकर खुदकुशी की धमकी पर उतर आए। बिल पर संसद के अंदर बहस जारी था बाहर विरोध के स्वर गूंज रहे थे। सदन में आखिरकार बीएसपी ने भी अपना हाथ झटक दिया।

गैरों की तो छोड़िए, अपने भी सरकार का साथ छोड़ने लगे। बिल पर सरकार में दरार साफ दिखी। विरोध का सुर एक ऐसी महिला की तरफ से था, जो खुद सरकार में शामिल एक पार्टी की मुखिया हैं और एक ज़िम्मेदार मंत्री भी। ममता बनर्जी ने हंगामा करने वाले सांसदों की आलोचना करने के बजाय सदन में मार्शल की कार्रवाई के लिए सरकारी खेमे की ही आलोचना कर डाली। विरोधियों के तर्क सही हो सकते है, लेकिन उनका तरीका गलत था, ये बात पूरे देश को समझ में आ रही थी, लेकिन न जाने क्यों ममता को ये बात क्यों समझ में नहीं आई।

लोकसभा में इस बिल को विरोध का लंबा सिलसिला रहा है। अब लोक सभा में पारित किए जाने की चुनौती सरकार के सामने है। सबसे पहले देवगौड़ा सरकार के वक्त 1996 में और फिर बाद में 1998 और 1999 में इस बिल को लोकसभा में पेश करने की कोशिश की गई थी। लोकसभा में पेश करने में तीन बार नाकाम रहने के बाद ही इसे राज्यसभा में पेश कर पहले राज्यसभा में पारित कराने की रणनीति अपनाई गई। आधी आबादी की पूरी जीत तब हासिल होगी जब लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित हो जाए। इस लम्हे का हम सभी को इंतजार रहेगा।

अमर आनंद

4 टिप्पणियाँ:

यहां 9 मार्च 2010 को 11:06 am, Blogger Anant Vishwakarma ने कहा…

आपका लेख बेहद ही विश्लेषणपूर्ण है..साथ ही सटीक भी..महिला और आरक्षण के बारे में आपके विचार सराहनीय हैं..अब देखना ये है कि इस आरक्षण को कितनी महिलाएं अपनी ताकत बना पाती हैं..ऐसे ही लेख लिखते रहें...

 
यहां 9 मार्च 2010 को 11:09 am, Blogger Issan Ranjan ने कहा…

THIS EXPLAINS ALL DETAILS. NOBODY NEEEDS TO READ ANYTHING IF ONE TO KNOW ABOUT ONGOING DEVELOPMENTS... शानदार...

 
यहां 9 मार्च 2010 को 11:15 am, Blogger abhishek bhatt ने कहा…

अमर आनंद जी, आपका ये 'तैंतीस की ताकत' का लेख राजनीति को परिभाषित करता है. इसमें आपने ये बताया है कि राजनीति में कब आपका कोई रकीब बन जाए, इसका पता नहीं.अब देखना ये होगा कि इस बिल पर कितनी महिला इसका सदुपयोग कर पाती हैं.आप इस तरह के लेख लिखकर समाज को जागरुक करते रहें....अभिषेक भट्ट.

 
यहां 10 मार्च 2010 को 1:40 am, Blogger शहरोज़ ने कहा…

बात कहने का ढंग तो है भाई..लेकिन क्या आरक्षण मिल जाने से उन महिलाओं का भी कुछ भला होगा जिन्हें हम दलित, पिछड़े या अल्पसंख्यक कहते हैं.

शब्द पुष्टिकरण हटा दो.कमेन्ट करने में दिक्क़त आती है.

 

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